महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती प्लेन क्रैश का मामला अब एक कानूनी और राजनीतिक युद्ध का रूप ले चुका है। बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार जब मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो उम्मीद थी कि इस मामले में आधिकारिक जांच की दिशा तय होगी। लेकिन वहां जो हुआ, उसने नए विवाद को जन्म दे दिया है। रोहित पवार का आरोप है कि सीनियर पुलिस अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव के चलते इस मामले में FIR दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) में FIR दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
पुलिस स्टेशन में क्या हुआ? रोहित पवार की जुबानी
रोहित पवार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जब वह पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां सब कुछ प्रक्रिया के तहत चल रहा था। FIR दर्ज करने के लिए अधिकृत एक जूनियर ऑफिसर और सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर (PI) वहां मौजूद थे। रोहित पवार ने उन्हें मामले की गंभीरता समझाई, जिसके बाद ऑफिसर एक लैपटॉप लेकर आए और FIR प्रिंट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब एक एडिशनल DCP रैंक के बड़े अधिकारी वहां पहुंचे और उन्होंने सीधे तौर पर FIR दर्ज करने से मना कर दिया। रोहित पवार का कहना है कि यह देश के हर नागरिक के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
किन लोगों और कंपनियों के खिलाफ है यह FIR?
रोहित पवार केवल दुर्घटना की जांच नहीं चाहते, बल्कि उन्होंने एक गहरी साजिश (Criminal Conspiracy) की ओर इशारा किया है। उन्होंने अपनी शिकायत में पांच मुख्य पक्षों को निशाने पर लिया है:
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VSR Ventures के सहयोगी: वह कंपनी जिसका एयरक्राफ्ट क्रैश हुआ।
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DGCA अधिकारी: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के वो अधिकारी जिन्होंने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की।
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ARROW कंपनी: जिसने इस घातक फ्लाइट को मंजूरी दी थी।
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राज्य सरकार से जुड़े अधिकारी: जो ARROW ग्रुप के भीतर काम कर रहे हैं।
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अज्ञात मास्टरमाइंड: जिसे रोहित पवार एक ‘आपराधिक साजिश’ का हिस्सा मान रहे हैं।
एविएशन मिनिस्टर और VSR के बीच ‘कनेक्शन’ का दावा
रोहित पवार ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी लपेटे में लिया है। उन्होंने केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू (TDP नेता) और VSR कंपनी के बीच कथित संबंधों का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इन्हीं कनेक्शनों और कई बड़े बीजेपी नेताओं के साथ VSR की नजदीकी की वजह से कंपनी के खिलाफ अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। रोहित पवार ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि क्या अजित पवार की मौत महज एक हादसा थी या यह जानबूझकर रची गई कोई साजिश? इसकी गहराई से जांच होनी जरूरी है।

28 जनवरी की DGCA रिपोर्ट और ‘क्लीन चिट’ का विवाद
28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर जब लियरजेट 45 (VT-SSK) क्रैश हुआ, जिसमें 66 वर्षीय अजित पवार सहित पांच लोगों की जान चली गई, उसके बाद DGCA की एक रिपोर्ट आई थी। रोहित पवार का कहना है कि तकनीकी रूप से उस रिपोर्ट में VSR कंपनी को ‘क्लीन चिट’ देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उड्डयन मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम है। उनके अनुसार, कल जो स्पष्टीकरण जारी किया गया, वह केवल जनता और मीडिया के भारी दबाव का नतीजा है, वरना सिस्टम इस मामले को रफा-दफा करने की तैयारी में था।
[Image showing Learjet 45 crash site at Baramati Airport]
क्या था वो भयावह हादसा? (घटनाक्रम)
यह हादसा 28 जनवरी 2026 की सुबह हुआ था। अजित पवार जिला पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे। उनका लियरजेट 45 विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार, उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), एक फ्लाइट अटेंडेंट और दो पायलटों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था।
फैक्ट चेक: क्या पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?
भारतीय कानून (ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामला) के अनुसार, यदि कोई शिकायत संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) की जानकारी देती है, तो पुलिस के लिए FIR दर्ज करना अनिवार्य है। रोहित पवार का तर्क है कि चूंकि इसमें पांच लोगों की जान गई है और साजिश की आशंका है, इसलिए पुलिस इसे ‘हादसा’ बताकर टाल नहीं सकती। DGCA ने अब मेसर्स VSR वेंचर्स के ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट’ का आदेश तो दे दिया है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस तकनीकी जांच पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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